hindi story of Believe on yourself

अपने कर्म पर विश्वास करो राशियों पर नहीं hindi story of Believe

hindi story of Believe on yourself

अपने कर्म पर विश्वास करो राशियों पर नहीं hindi story of Believe on yourself

आधुनिक युग में एतिहासिक काल से सिर्फ 12 राशियों को को महत्व दिया जाता है ! जिनमे मिथुन , सिंह , कर्क ,तुला ,मेष , कन्या , मीन , धनु , कुम्भ , वृश्चिक , वृषभ , मेष है !

लेकिन अगर इस धरती पर इन्सान रूपी जीव की बात की जाये तो लगभग भारत में 135 करोड़ से भी अधिक है !

अगर 135 करोड़ को 12 से विभाजित किया जाये तो लगभग 11- 11 करोड़ लोगो का भविष्य एक जैसा होना चाहिए !

परन्तु ऐसा नहीं है !

लेकिन हम अपनी आँखों से जो देख रहे है वह इस प्रकार है की हर इन्सान को अलग अलग तरह के सुख दुःख मिल रहे है !

जबकि राशि पर विस्वास करने से यह प्राप्त होता है ! सभी तुला राशि वालो का सुख दुःख एक जैसा होना चाहिए और सभी सिंह राशि वालो का सुख दुःख एक जैसा होना चाहिए !

मतलब एक समान राशि वालो का सुख दुःख एक समान ही होना चाहिए ! लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है !

राशियों से विस्वास को नस्ट करने वाले तथ्व

राशियों पर विस्वास हमें क्यों नहीं करना चाहिए इसके पुख्ता सबूत हमें एतिहासिक काल से लेकर आज तक मिलते आये है जिनमे कुछ इस प्रकार है !

माना की कृष्ण और कंस की एक ही राशि है लेकिन दोनों का स्वभाव और दोनों का सुख दुःख और दोनों के कर्म अलग अलग है ! जबकि राशि के अनुसार एक जैसे होने चाहिए !

ओबामा- ओसामा एक ही राशि है लेकिन कर्म अलग अलग है !

राम- रावण राशि एक ही लेकिन कर्म अलग अलग !

गाँधी- गोडसे राशि दोनों की एक जैसी लेकिन कर्म दोनों के अलग अलग !

इन सभी से हमे यह ज्ञात होता है की इन्सान की राशि सेम हो सकती है लेकिन कर्म सभी के अलग अलग होते है !

कर्म प्रधान होता है !

कर्म प्रधान होता है ! इसका जीवता जागता उदाहरण हमारे सामने है ! जब ICC का सबसे बड़ा टूर्नामेंट चल रहा था word cup 2011

Final match में भारत और श्रीलंका का महा मुकाबला था ! इस मुकाबले में दोनों टीमो के कप्तानो की राशि ( महेंद्र सिंह धोनी और महिला जयवर्धने ) सेम थी !

लेकिन आखिर final का यह महा मुकाबला भारत ही जीता ! क्योकि कर्म प्रधान है !

अगर भारतीय कप्तान MS dhoni अपने धुरेंद्रो को सही से गाइड नहीं करते तो शायद भारत उस विश्व कप को नहीं जीत पाता !

भाग्य और कर्म में अंतर

राशियों से ही मिलता जुलता शब्द है ! भाग्य

लेकिन कर्म भाग्य से बड़ा होता है ! इस बात की पुष्टि महर्षि वाल्मीकि रामायण के अंदर कर चुके है !

रामायण में एक दोहा है !

कोहू न काहू सुख दुःख दात्ता

निज कर्म कृत भोग सब भ्राता

इस दुनिया में कोई किसी को सुख दुःख देने वाला नहीं है ! सभी अपने अपने कर्मो का ही फल भोगते है ! मतलब यहाँ भी कर्म को ही बड़ा समजा गया है !

लक भाग्य नसीब व् किस्मत और मेहनत में बड़ा कोन ?

लक भाग्य और नसीब यह सभी एक ही शब्द के पर्यावाची शब्द है ! और इनका मतलब भी एक ही होता है ! लेकिन इन सभी में मेहनत को बड़ा बताया गया है !

जानिए वह कैसे

ऐसे बोला जाता है की इन्सान अगर अपने कर्म को बदल सकता है ! तो किस्मत अपने आप बदल जाती है !

मुझे नही पता की मेरी किस्मत में क्या लिखा है ! मगर मेरा कर्म है की मुझे एक बहुत बड़े लेवल पर motivational speaker बनना है !

में इसी तरीके से मेहनत कर रहा था ! और आज में एक चर्चित motivational speaker बन गया !

अगर में सोचता की पता नहीं मेरी किस्मत में क्या लिखा है ! तो शायद में आज घर पर free बैठकर माँ बाप के ताने सुन रहा होता

वैसे भी अगर देखा जाये तो

लक = 2 अक्षर

भाग्य = 2.5 अक्षर

नसीब = 3 अक्षर

किस्मत = 3.5 अक्षर

और मेहनत = 4 अक्षर

सबसे बड़ा मेहनत है ! आप जितना कर सकते है वैसा ही बन सकते है !

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Final Word

उम्मीद करता हु आपको यह लेख आपको बहुत पसंद आया

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अपने कर्म पर विश्वास करो राशियों पर नहीं hindi story of Believe on yourself में बस इतना ही | धन्यवाद |

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