Life Motivational story in Hindi

एक गिलास लस्सी ने जीना सिखाया Life Motivational story in Hindi

Life Motivational story in Hindi

Live life Motivational story in Hindi for success

यह बात बिल्कुल सत्य है की जिन्दगी को आज तक ना तो किसी ने सही बताया और ना ही किसी ने गलत बताया ! कुछ लोग इसे गम का सागर कहते है तो वही कुछ लोग इसे खुशियों की सोगात नाम देते है ! क्योकि इसका कारन यह है की सभी लोग मरते तो है लेकिन वास्तव में सभी जीते नहीं है !

क्योकि हर इन्सान जिन्दगी की परिभाषा मात्र तीन शब्दों में दे देता है ” जिन्दगी चलती जाएगी ” ! लेकिन यह किसी को नहीं पता की जिन्दगी आखिर चलेगी कैसे !

आम आदमी जिन्दगी की लम्बाई तो जरुर नापता है लेकिन किसी ने गहराई की कोई फ़िक्र नहीं की ! और जब तक जिन्दगी की गहराई पता चलती है तब तक यह आधी ख़त्म हो जाती है !

यह सच्चाई है की जितने दिन की जिन्दगी इन्सान को मिलती है उतने दिन इन्सान उसे जी नहीं पाता ! आखिर …

मुझे तो एक दिन एक गिलास लस्सी ने जिन्दगी जीना सीखा दिया अब बारी आपकी है !

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Life Motivational story in Hindi

हम चार दोस्त है चारो बहार रहकर जॉब करते है एक समय ऐसा आया की हम चारो दोस्त गाँव आये हुए थे ! सभी एक दूसरे से मिलकर बहुत खुश हो रहे थे ! तथा सभी ने प्लान किया की हम चारो एक साथ चलकर किसी लस्सी वाले की दुकान पर चलते है वहा बैठकर ताजा – ताजा लस्सी पियेंगे और बाते करते करते एक दूसरे का हाल चाल भी पूछेंगे !

सभी दोस्त एक ताऊ लस्सी वाले के पास पहुंचे और चार गिलास लस्सी का आर्डर किया ! ताऊ लस्सी में मलाई डालकर तैयार कर ही रहे थे की एक बूढी ओरत सामने से आई और हाथ फैलाकर कुछ पैसा मांगने लगी !

उन चारो में में भी सामिल था मुझे बहुत दया आ रही थी ! मैंने एक 10 रूपये का नोट निकालकर बूढी माँ के हाथ में रख दिया ! लेकिन मेरा मन था की में एक गिलास लस्सी बूढी माँ के लिए भी ऑर्डर करू ! और मैंने ऐसा ही किया !

लेकिन ताऊ लस्सी वाले ने उस बूढी ओरत को बिखारन समझ कर वहा से जाने को कहा ! में उसी ओरत के पास जाकर नीचे जमीन पर ही बैठ गया ! लोग मुझे गहराई से देख रहे थे ! मुझे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला !

लस्सी तैयार है

इतने में ही ताऊ लस्सी वाले ने आवाज लगाकर बताया की आपकी लस्सी तैयार है आप आकर ले लिजिये ! में उठा और एक गिलास मेरा तथा एक गिलास बूढी ओरत का लेकर वापिश जमीन पर आकर बैठ गया ! बूढी ओरत ने प्यार से लस्सी का गिलास पिया और मुझे ढेर सारी दुआए देकर चली गई ! मेरे दोस्त मुझे घूर घूर कर देख रहे थे ! पर कोई बात नहीं !

में ताऊ के पास जाकर पांच गिलाश लस्सी के पैसे देने लगा लेकिन ताऊ ने एक भी गिलास लस्सी के पैसे नहीं लिए और भावुक होकर बोला में आपसे पैसे नहीं लूँगा ! आपने तो मेरा जीवन ही धन्य कर दिया ! मैंने भी पूछा कैसे

ताऊ बोले यहाँ पर ग्राहक तो हर रोज आते है लेकिन इन्सान कभी कभी आता है ! आज मेरी दुकान पर इन्सान आया हुआ है ! क्योकि यह बूढी ओरत हर रोज यहाँ पर आती थी ! पर किसी ने क्या मैंने भी आज तक दया नहीं की !

यह बात सुनकर मेरे दोस्त भी भावुक हो गये ! और हमने हमेशा बुजुर्ग लोगो पर दया करने का संकल्प लिया !

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सीख :-

जैसे बिना पंक्षी के घोंसला अधुरा सा लगता है वैसे ही बिना दया के सोने का दिल भी अधुरा सा लगता है ! और जिस इन्सान में दया नहीं होती है वह पशु के समान ही होता है !

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