motivational story in hindi Rakshabandhan

रक्षाबंधन कहानी motivational story in hindi Rakshabandhan

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रक्षाबंधन की कहानी motivational story in hindi Rakshabandhan

रक्षाबंधन का त्यौहार श्रावण माह के अंत में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है ! इस त्यौहार को को ” बलेव ” नाम से भी जाना जाता है !

क्योकि भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर राजा बलि के अभिमान को चूर चूर कर दिखाया था ! इस लिए इस त्यौहार को बलेव के नाम से भी जाना जाता है !

भारत दुनिया का ऐसा देश है जहा विविधता में एकता का प्रतीक सामने झलकता है ! इसलिए भी इस त्यौहार को हर राज्य में अलग अलग नाम से भी जाना जाता है !

महाराष्ट्र राज्य में इस त्यौहार को नारियल पूर्णिमा और श्रावणी के नाम से भी जाना जाता है !

इस दिन यहाँ समुन्द्र की पूजा की जाती है ! और नदी के तट पर जाकर लोग अपने जनेऊ बदलते है !

रक्षाबंधन को लेकर एक पोराणिक इतिहास यह भी बयान करता है ! की जब देवता और दानवो में युद्ध चल रहा था ! इस युद्ध में देवता हारते हुए दिखाई दे रहे थे तभी देवराज इंद्र के पास पहुचे !

और इन्द्राणी ने देवताओ को भयभीत और विचलित देखकर उनके हाथो में रक्षा सूत्र बांधने का निर्णय किया !

यह देखकर सभी देवता प्रफुल्लित हो गये तथा बड़े हुए आत्मविश्वास के साथ युद्ध किया और दानवो पर विजय प्राप्त की ! और ऐसा माना जाता है की इसी दिन से राखी बांधने की परम्परा शुरू हुई !

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भाई – बहन का त्यौहार रक्षाबंधन

रक्षाबंधन भाई बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक का त्यौहार भी है ! इस दिन बहन अपने भाई को प्यार से राखी बांधती है ! और अपने भाई के लिए अनेक सुभकानाओ की गुहार लगाती है !

इस दिन भाई अपनी बहन को यथा शक्ति उपहार भेंट करता है ! और सच तो यह है की बीते हुए बचपन के वो दिन भाई बहन को याद आते है और जो बहुत अच्छे लगते है !

इसमें कोई संसय नहीं है की भाई बहन का यह त्यौहार भाई को अपने बहन के प्रति अपने कर्तव्य को याद दिलाता है !

रक्षाबंधन से जुड़ा इतिहास

राखी रूपी धागे ने इतिहास में अनेको कुरबानिया कराई है !

ऐसा माना जाता है की चित्तोडगढ की रानी कर्मवती ने मुगल बादसाह हिमायु को राखी भेजकर अपना भाई बनाया था और वो अपने अपनी बहन की रक्षा के लिए तुरंत चित्तोडगढ चले आये थे !

राखी के इस त्यौहार का मतलब मन की पवित्र भावनाओ से है ! ना की अपनी बहन को उपहार देकर ख़त्म करने से है !

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रक्षाबंधन का त्यौहार हमें अपने भाई बहन के प्रति मान सम्मान को जीवत करने का एक मात्र त्यौहार है ! आज से हम सभी को यह प्रण करना चाहिए की हम अपनी बहन की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति भी दे तब भी कम है !

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