The story of rabbit and tortoise

खरगोश कछुआ की दोड़ कछुआ जीत गया उसके बाद की कहानी

The story of rabbit and tortoise

खरगोश और कछुआ की कहानी आपने ना जाने कितनी बार सुनी होगी आप सुनते सुनते थक भी गये ! बचपन में कभी दादी सुनाती थी तो कभी चाची तो कभी नानी सभी का सारांश सभी का भावार्थ सभी की शीख सभी के word हमेशा एक होते थे की एक खरगोश होता है जिसको अपनी तेज दोड़ पर घमंड होता है और उसी घमंड से वो किसी को भी challenge करता रहता है

उसने एक दिन एक कछुआ को ललकारा दोड़ के लिए कछुआ तैयार होता है दोनों दोड़ लगाते है खरगोश आगे निकल कर सो जाता है और कछुआ धीरे धीरे चलकर भी जीत जाता है

शीख मिलती है की हमे घमंड नहीं करना चाहिए और साथ में यह भी शीख मिलती है की धीरे और लम्बा चलने वाला हमेशा जीतता है

तथा इन्सान को लक्ष्य पाकर ही साँस लेना चाहिए उससे पहले नहीं रुकना चाहिए

यहाँ तक आप सभी ने सुना लेकिन आगे क्या होता है

आगे क्या हुआ story on rabbit and tortoise

दोड़ हारने के बाद खरगोश को अपसोस होता है और सोचता है अति आत्मविश्वास के कारन मुझे इस दोड़ में कछुआ से हार का सामना करना पड़ा मुझे आराम नहीं करना चाहिए था मुझे लक्ष्य पाकर ही रुकना चाहिए

खरगोश कछुआ के पास फिर से गया और बोलने लगा आज हम फिर से दोड़ लगाते है उधर कछुआ आत्मविश्वास से भरा हुआ था उसने फिर से दोड़ लगाने को yes बोल दिया और दोनों तैयार हो जाते है

लेकिन खरगोश ने एक शर्त रखी की इस बार दोड़ सुखी जमीन पर होगी बिल्कुल रेत होगी रेगिस्तान के जैसा धूल उड़ रही होगी

कछुआ ने बोला ठीक है और फिर दोनों दोड़ने लगे रेस चालू हो गयी खरगोश दोड़ कर बहुत आगे निकल गया लेकिन उस रेगिस्तान में कछुआ से दोड़ नहीं लग पा रही कछुआ के पैर जलने लगे इतने में खरगोश बहुत आगे निकल गया और अपने लक्ष्य पर पहुच गया और मानो की कछुआ दोड़ हार गया

कछुआ को बहुत अफ़सोस हुआ अपनी हार पर

अगले दिन कछुआ खरगोश के पास गया और बोलने लगा खरगोश कल मैंने आपकी बात मानी आज आप को मेरी बात माननी पड़ेगी आज हम फिर से दोड़ लगाते है

लेकिन आज मेरी एक सर्त है इस बार दोड़ समुन्द्र में होगी हम पानी में दोड़ लगायेंगे

खरगोश एक बार सोचने लगा लेकिन yes बोल दिया और दोनों चल दिए समुन्द्र की ओर जहा पर उनको दोड़ लगानी थी दोनों समुन्द्र के पास पहुच कर पानी में उतरने लगे

कछुआ पानी ही पानी में अपने लक्ष्य तक पहुच गया लेकिन खरगोश पानी में एक मीटर भी नहीं चल सका

इस बार कछुवा दोड़ जीत गया और खरगोस हार गया

अगले दिन फिर से दोनों एकत्रित हुए और एक दुसरे से बोलने लगे खरगोश बोलने लगा सुन कचूआ तुम जमीन पर नहीं चल सकते और में पानी में नहीं चल सकता तुम पानी में चल सकते हो में जमीन पर चल सकता हु

इस बार हमारी दोड़ आधी पानी पर होगी और आधी रेत पर जब हम रेत पर दोड़ लगायेंगे उस वक्त तुम मेरे उपर बैठना और जब हम पानी में दोड़ लगायेंगे उस वक्त में आप के उपर बैठूँगा कछुआ में खरगोश की इस बात को माना और दोनों दोड़ लगाने चल दिए

नतीजा यह रहा की ना तो कोई जीता और ना कोई हारा

आप यहाँ से यह भी पढना ना भूले

इस कहानी से हमे यह समझ आता है की हमें एक दुसरे की मदद करनी चाहिए ताकि कोई हारे नहीं और हम सभी दोड़ जीत सकते है किसी को हरा कर जितना उतना ख़ुशी नहीं देता जितना किसी को जीता कर जितने में है

दोस्तों इस कहानी में हमने story on rabbit and tortoise पढ़ी उम्मीद करता करता हु आप को बहुत कुछ new शीखने को मिला प्लीज आप इस hindi kahaniya के पेज को subscribe करे और अपने दोस्तों को share भी करे

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