what is untouchability in india

डॉ.अम्बेडकर का छुआछूत के विरुद्ध संघर्ष untouchability

Dr. Ambedkar struggle against untouchability

अम्बेडकर हमेशा दलितों को बोलते थे तुम मेरी बात को समझो यह छुआछूत गुलामी से भी बदतर बीमारी है ! अम्बेडकर बहुत अधिक शिक्षा प्राप्त व्यक्ति होने के कारन इनको महाराज गायक वाड के यहाँ नोकरी तो मिल गयी लेकिन छुआछूत के कारन इनको यह नोकरी छोडनी पड़ी और untouchability के खिलाप संघर्ष करना start कर दिया

Struggle 1

इस संघर्ष को हर अछूत तक पहुचाने के लिए इन्होने एक book लिखी जिसका नाम आत्मकथा वेटिंग फॉर अ वीजा था untouchability

बाबा साहब को तब बहुत ज्यादा निचे झुकना पड़ा जब इन्होने अपनी जीविका चलाने के लिए कुछ व्यवसाय किये लेकिन जब पता लगा की सामने वाला अछूत है तो उनका कोई भी व्यवसाय नहीं चल पाया untouchability

Struggle 2

उसके बाद यह 1918 में a professor of political economics at Sydenham College of Commerce and Economics in Mumbai. बने ! लेकिन वहा पर भी बाकि के प्रोफ़ेसर ने अपने बर्तन साझा करने के लिए मना कर दिया

Struggle 3

सन 1919 में बाबा साहब ने दलितों और अन्य धार्मिक समुदायों के लिये पृथक निर्वाचिका और आरक्षण देने की वकालत की

Struggle 4

1920 में बाबा साहब ने रूढ़िवादी हिंदू राजनेताओं व जातीय भेदभाव से लड़ने के प्रति भारतीय राजनैतिक समुदाय की अनिच्छा की आलोचना करने के लिये साप्ताहिक मूकनायक के प्रकाशन की शुरूआत की ! और उसमे ये काफी हद तक सफल भी रहे

एक बार दुनिया में तब हल चल मच गया जब कोल्हापुर राज्य के स्थानीय शासक शाहू चतुर्थ ने बाबा साहब के साथ खाना खाया !

Struggle 5

अछूतों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डॉ अम्बेडकर ने बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना की जिसका मैंन मकसद था की सामाजिक आर्थिक और शिक्षा में सुधार लाना था

Struggle 6

जब दलितों के अधिकारों का बहिस्कार किया जा रहा था तो यह बात बाबा साहब को अच्छी नहीं लगी और उन्होंने दलितों के अधिकार की सुरक्षा के लिए 1 मूकनायक 2बहिष्कृत भारत 3समता 4प्रबुद्ध भारत और 5जनता जैसी पांच पत्रिकाएं निकालीं

Struggle 7

सन 1925 में बाबा साहब को साइमन कमिशन में काम करने के लिए नियुक्त किया गया लेकिन भारत में इसका भी विरोध होने लगा ! इसके लिए अम्बेडकर ने अलग से भविष्य के संवैधानिक सुधारों के लिये सिफारिश लिखकर भेजीं

Struggle 8

1 जनवरी सन 1927 को 1 जनवरी सन 1818 को हुई कोरेगाँव की लड़ाई के दौरान मारे गये भारतीय महार सैनिकों के सम्मान में आम्बेडकर ने कोरेगाँव विजय स्मारक में एक meeting का आयोजन किया ! जिसमे जिसमे यह फैशला लिया गया की जितने भी हमारे सैनिक सहीद हुए है! उन सभी का नाम संगमरमर के पत्थर पर लिखकर कोरेगाँव को दलित स्वाभिमान का प्रतीक बनाया

Struggle 9

सन 1927 में बाबा साहब ने सभी दलितों को सार्वजानिक जल स्थल पर पानी पीने तथा दलितों को मंदिर में घुसने का अधिकार दिलाने के लिए जुलुस और रेलिया निकाली!

Struggle 10

सन 1927 के अंत में भीम राव ने प्राचीन हिंदू पाठ मनुस्मृति का खुल कर विरोध किया

Struggle 11

25 दिसम्बर 1927 को हजारो दलितों का समर्थन लेकर बाबा साहब ने मनुस्मृति को जलाया

इसलिए सम्पूर्ण भारत में मनुस्मृति दहन दिवस मनाया जाता है 25 दिसम्बर को

Struggle 12

सन 1930 में अम्बेडकर ने 15000 दलितों को लेकर नाशिक की सबसे बड़ी प्रक्रियाएं की

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Final Word

दोस्तों इस article में हमने देश के महा नायक डॉ.अम्बेडकर का छुआछूत के विरुद्ध संघर्ष Struggle against untouchability को दोहराया ! अगर आप मुझे कुछ सुझाव देना चाहते है ! तो प्लीज comment बॉक्स में तुरंत सम्पर्क करे और अधिक जानकरी के लिए visit करे www.indiahindinews.in

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